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वन विभाग में ‘पौधारोपण घोटाला’! शिकायतें सत्य, जांच पूरी… फिर भी जिम्मेदारों पर कार्रवाई क्यों नहीं?

मरवाही वनमंडल में 32.77 लाख का खेल! जांच में 1.06 लाख पौधे गायब, शिकायतें सत्य, फिर भी कार्रवाई का इंतजार

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही। मरवाही वनमंडल में पौधारोपण और पौधा तैयारी कार्यों में कथित वित्तीय अनियमितताओं का मामला अब बड़ा घोटाला बनता नजर आ रहा है। विधानसभा में मामला उठने के बाद गठित जांच समिति की रिपोर्ट ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। रिपोर्ट में 1 लाख 6 हजार 606 पौधों की कमी, रिकॉर्ड संधारण में भारी लापरवाही और 32 लाख 77 हजार रुपये के अतिरिक्त भुगतान जैसे गंभीर तथ्य सामने आए हैं। इसके बावजूद अब तक किसी जिम्मेदार अधिकारी पर ठोस कार्रवाई नहीं होना कई सवाल खड़े कर रहा है।

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जांच रिपोर्ट के अनुसार मरवाही की चिचगोहना और खोड़ी की सधवानी रोपणी में पौधा तैयार करने से जुड़े अभिलेखों का व्यवस्थित संधारण नहीं किया गया। इतना ही नहीं, पॉलीथीन बैग, रेत, गोबर खाद, बोनमील और सागौन रूटशूट जैसी सामग्रियां कार्यादेश जारी होने से पहले ही प्राप्त होना पाई गईं, जिससे खरीद प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठ गए हैं।

सबसे बड़ा खुलासा पौधों की संख्या को लेकर हुआ। कैम्पा और ग्रीन क्रेडिट योजना के तहत कुल 5,71,901 पौधे तैयार किए जाने थे, लेकिन जांच में केवल 4,65,295 पौधे ही तैयार पाए गए। यानी 1,06,606 पौधे कम मिले। इन पौधों को बाद में अन्य स्रोतों से लाकर उपयोग किए जाने का दावा किया गया, जबकि इन्हीं के नाम पर 32.77 लाख रुपये का भुगतान भी व्यय भारित कर दिया गया।

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जांच समिति ने तत्कालीन मुख्य वन संरक्षक बिलासपुर द्वारा की गई शिकायतों में से शिकायत क्रमांक 1, 2 और 3 को सत्य माना है। यह तथ्य अपने आप में पूरे मामले की गंभीरता को उजागर करता है।

अब सवाल यह है कि जब जांच रिपोर्ट में अनियमितताओं की पुष्टि हो चुकी है, तब जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही? विभागीय गलियारों में चर्चा है कि मामले को फाइलों में उलझाकर जिम्मेदार लोगों को बचाने की कोशिश की जा सकती है। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

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वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार पिंगुआ और प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख अरुण कुमार पाण्डेय की भूमिका अब सबसे महत्वपूर्ण हो गई है। क्या वे निष्पक्ष कार्रवाई कर जवाबदेही तय करेंगे या फिर करोड़ों रुपये की योजनाओं से जुड़ा यह मामला भी अन्य विभागीय जांचों की तरह ठंडे बस्ते में चला जाएगा?

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